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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 34
अलं महीपाल तव श्रमेण प्रयुक्तमप्यस्त्रमितो वृथा स्यात् । स पादपोन्मूलनशक्ति रंहः शिलोच्चये मूर्च्छति मारुतस्य ॥
हे राजन्, तुम्हारा यह प्रयास व्यर्थ है, यहाँ प्रयुक्त अस्त्र निष्फल होगा, क्योंकि वृक्षों को उखाड़ने वाली वायु भी पर्वत पर आकर निष्प्रभावी हो जाती है।
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