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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 3
निवर्त्य राजा दयितां दयालुस्तां सौरभेयीं सुरभिर्यशोभिः । पयोधरीभूतचतुःसमुद्रां जुगोप गोरूपधरामिवोर्वीम् ॥
दयालु राजा ने अपनी प्रिय पत्नी को लौटाकर, उस सुरभि-कन्या धेनु की रक्षा वैसे की जैसे चारों समुद्रों से घिरी पृथ्वी की रक्षा की जाती है।
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