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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 27
सा दुष्प्रधर्षा मनसापि हिंस्रैरित्यद्रिशोभाप्रहितेक्षणेन । अलक्षिताभ्युत्पतनो नृपेण प्रसह्य सिंहः किल तां चकर्ष ॥
वह जिसे हिंसक जीव मन से भी आहत नहीं कर सकते थे, उसी पर पर्वत की शोभा देखने में लगे राजा की दृष्टि से छिपकर एक सिंह ने अचानक आक्रमण कर उसे पकड़ लिया।
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