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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 25
इत्थं व्रतं धारयतः प्रजार्थं समं महिष्या महनीयकीर्तेः । सप्त व्यतीयुस्त्रिगुणानि तस्य दिनानि दीनोद्धरणोचितस्य ॥
इस प्रकार प्रजा के लिए अपनी पत्नी सहित व्रत धारण करने वाले उस महान कीर्तिवान राजा के इक्कीस दिन इस योग्य कार्य में व्यतीत हो गए।
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