वन के अंत से लौटते हुए उस वसिष्ठ की धेनु के अनुयायी राजा को स्त्रियाँ अपनी पलकों को झपकाए बिना ऐसे देख रही थीं मानो उनकी आँखें उपवास से तृप्त हो रही हों।
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