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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 19
वसिष्ठधेनोरनुयायिनं तमावर्तमानं वनिता वनान्तात् । पपौ निमेषालसपक्ष्मपङ्क्तिरुपोषिताभ्यामिव लोचनाभ्याम् ॥
वन के अंत से लौटते हुए उस वसिष्ठ की धेनु के अनुयायी राजा को स्त्रियाँ अपनी पलकों को झपकाए बिना ऐसे देख रही थीं मानो उनकी आँखें उपवास से तृप्त हो रही हों।
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