स पल्वलोत्तीर्णवराहयूथान्यावासवृक्षोन्मुखबर्हिणानि । ययौ मृगाध्यासितशाद्वलानि श्यामायमानानि वनानि पश्यन् ॥
वह दलदल से निकलते हुए वराहों के झुंड, निवास वृक्षों की ओर जाते मोर और हिरणों से युक्त हरे-भरे वन को देखता हुआ आगे बढ़ा।
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