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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 15
संचारपूतानि दिगन्तराणि कृत्वा दिनान्ते निलयाय गन्तुम् । प्रचक्रमे पल्लवरागताम्रा प्रभा पतंगस्य मुनेश्च धेनुः ॥
दिनभर अपने विचरण से दिशाओं को पवित्र कर, सायंकाल में पत्तों की लालिमा जैसी सूर्य की आभा के साथ वह धेनु आश्रम की ओर लौटने लगी।
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