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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 10
मरुत्प्रयुक्ताश्च मरुत्सखाभं तमर्च्यमारादभिवर्तमानम् । अवाकिरन्बाललताः प्रसूनैराचारलाजैरिव पौरकन्याः ॥
वायु द्वारा हिलाई गई बाल लताएँ उस वायु-समान तेजस्वी राजा के समीप आने पर उसे फूलों से ऐसे अभिषिक्त कर रही थीं जैसे नगर की कन्याएँ लाज से अर्पण करती हैं।
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