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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 1
अथ प्रजानामधिपः प्रभाते जायाप्रतिग्राहितगन्धमाल्याम् । वनाय पीतप्रतिबद्धवत्सां यशोधनो धेनुमृषेर्मुमोच ॥
प्रातःकाल प्रजाओं के अधिपति राजा ने अपनी पत्नी द्वारा अर्पित सुगंधित माला धारण कर, बछड़े को दूध पिलाकर बाँधी गई उस धेनु को वन के लिए मुक्त किया।
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