यौवनोन्नतविलासिनीस्तनक्षोभलोलकमलाश्च दीर्घिकाः । गूढमोहनगृहास्तदम्बुभिः स व्यगाहत विगाढमन्मथः ॥
वह यौवनोन्मत्त होकर स्त्रियों के साथ जलक्रीड़ा करता और गुप्त कक्षों में रमण करता था।
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