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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 6
इन्द्रियार्थपरिशून्यमक्षमः सोढुमेकमपि स क्षणान्तरम् । अन्तरेव विहरन्दिवानिशं न व्यपैक्षत समुत्सुकाः प्रजाः ॥
वह इन्द्रियों के विषयों के बिना एक क्षण भी नहीं रह सकता था और दिन-रात भोग में लिप्त रहता, प्रजा की ओर ध्यान नहीं देता था।
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