मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 57
तं भावार्थं प्रसवसमयाकाङ्क्षिणीनां प्रजाना- मन्तर्गूढं क्षितिरिव नभोबीजमुष्टिं दधाना । मौलैः सार्धं स्थविरसचिवैर्हेमसिंहासनस्था राज्ञी राज्यं विधिवदशिषद्भर्तुरव्याहताज्ञा ॥
प्रजा के भविष्य की आशा रूप उस गर्भ को धारण कर, रानी ने वृद्ध मंत्रियों के साथ स्वर्ण सिंहासन पर बैठकर पति की आज्ञा के अनुसार राज्य का शासन किया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें