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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 56
तस्यास्तथाविधनरेन्द्रविपत्तिशोकादुष्णैर्विलोचनजलैः प्रथमाभितप्तः । निर्वापितः कनककुम्भमुखोज्झितेन वंशाभिषेकविधिना शिशिरेण गर्भः ॥
राजा की मृत्यु के शोक से तप्त रानी का गर्भ, स्वर्ण कलश के जल से किए गए वंशाभिषेक से शीतल होकर सुरक्षित रखा गया।
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