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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 54
तं गृहोपवनएव संगताः पश्चिमक्रतुविदा पुरोधसा । रोगशान्तिमपदिश्य मन्त्रिणः संभृते शिखिनि गूढमादधुः ॥
मंत्रियों और पुरोहितों ने घर के उपवन में ही रोग शांति का बहाना कर गुप्त रूप से उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
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