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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 53
स त्वनेकवनितासखोऽपि सन्पावनीमनवलोक्य संततिम् । वैद्ययत्नपरिभाविनं गदं न प्रदीप इव वायुमत्यगात् ॥
अनेक स्त्रियों के साथ रहने पर भी वह संतान प्राप्त नहीं कर सका और वैद्यों के प्रयासों को व्यर्थ कर, रोग से मर गया जैसे दीपक वायु से बुझ जाता है।
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