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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 46
यत्स लग्नसहकारमासवं रक्तपाटलसमागमं पपौ । तेन तस्य मधुनिर्गमात्कृशश्चित्तयोनिरभवत्पुनर्नवः ॥
जब वह आम के पुष्पों से युक्त मदिरा पीता, तो उसके मन में पुनः नवीन कामभाव उत्पन्न हो जाता था।
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