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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 44
ताः स्वमङ्कमधिरोप्य दोलया प्रेङ्खयन्परिजनापविद्धया । मुक्तरज्जु निबिडं भयच्छलात्कण्ठबन्धनमवाप बाहुभिः ॥
उन्हें गोद में बैठाकर झूला झुलाते हुए, वह भय का बहाना बनाकर उन्हें अपनी बाहों में कसकर बाँध लेता था।
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