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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 43
दक्षिणेन पवनेन संभृतं प्रेक्ष्य चूतकुसुमं सपल्लवम् । अन्वनैषुरवधूतविग्रहास्तं दुरुत्सहवियोगमङ्गनाः ॥
दक्षिण पवन से हिलते आम के पुष्पों को देखकर, स्त्रियाँ उससे अलग होना असह्य मानकर उसके पीछे-पीछे चलती थीं।
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