कार्तिकीषु सवितानहर्म्यभाग्यामिनीषु ललिताङ्गनासखः । अन्वभुङ्क्त सुरतश्रमापहां मेघमुक्तविशदां स चन्द्रिकाम् ॥
कार्तिक मास की चाँदनी रातों में वह स्त्रियों के साथ प्रेम की थकान दूर करने वाली निर्मल चन्द्रिका का आनंद लेता था।
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