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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 37
अंसलम्बिकुटजार्जुनस्रजस्तस्य नीपरजसाङ्गरागिणः । प्रावृषि प्रमदबर्हिणेष्वभूत्कृत्रिमाद्रिषु विहारविभ्रमः ॥
वर्षा ऋतु में पुष्पमालाओं और सुगंध से युक्त होकर वह कृत्रिम पर्वतों में स्त्रियों के साथ विहार करता था।
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