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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 32
तस्य निर्दयरतिश्रमालसाः कण्ठसूत्रमपदिश्य योषितः । अध्यशेरत बृहद्भुजान्तरं पीवरस्तनविलुप्तचन्दनम् ॥
रतिक्रीड़ा से थकी हुई स्त्रियाँ उसके गले का हार हटाकर उसके विशाल वक्ष पर लेट जाती थीं, जिससे चन्दन मिट जाता था।
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