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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 31
मित्रकृत्यमपदिश्य पार्श्वतः प्रस्थितं तमनवस्थितं प्रियाः । विद्म हे शठ पलायनच्छलान्यञ्जसेति रुरुधुः कचग्रहैः ॥
जब वह मित्र के कार्य का बहाना बनाकर जाने लगा, तब प्रियाओं ने उसके केश पकड़कर कहा—हे छलिया, हम तुम्हारे बहाने भलीभाँति जानती हैं।
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