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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 29
कण्ठसक्तमृदुबाहुबन्धनं न्यस्तपादतलमग्रपादयोः । प्रार्थयन्त शयनोत्थितं प्रियास्तं निशात्ययविसर्गचुम्बनम् ॥
रात के अंत में प्रियाएँ उसके गले लगकर और चरणों में गिरकर उससे विदा के चुम्बन की प्रार्थना करती थीं।
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