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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 27
चुम्बने विपरिवर्तिताधरं हस्तरोधि रशनाविघट्टने । विघ्नितेच्छमपि तस्य सर्वतो मन्मथेन्धनमभूद्वधूरतम् ॥
चुम्बन, आलिंगन और वस्त्रों के उलझने में, उसकी इच्छा में बाधा आने पर भी उसका कामभाव और बढ़ जाता था।
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