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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 25
चूर्णबभ्रु लुलितस्रगाकुलं छिन्नमेखलमलक्तकाङ्कितम् । उत्थितस्य शयनं विलासिनस्तस्य विभ्रमरतान्यपावृणोत् ॥
उसके उठने पर बिखरे हुए पुष्प, टूटी मेखला और अलक्तक के चिह्न उसके रतिक्रीड़ा के रहस्यों को प्रकट कर देते थे।
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