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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 22
स्वप्नकीर्तितविपक्षमङ्गनाः प्रत्यभैत्सुरवदन्त्य एव तम् । प्रच्छदान्तगलिताश्रुबिन्दुभिः क्रोधभिन्नवलयैर्विवर्तनैः ॥
स्वप्न में कही गई बातों से शंकित स्त्रियाँ आँसुओं और क्रोध से भरे हावभावों के साथ उससे प्रश्न करती थीं।
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