प्रातरेत्य परिभोगशोभिना दर्शनेन कृतखण्डनव्यथाः । प्राञ्जलिः प्रणयिनीः प्रसादयन्सोऽदुनोत्प्रणयमन्थरः पुनः ॥
प्रातःकाल भोग से उत्पन्न थकान के बाद वह हाथ जोड़कर अपनी प्रियाओं को मनाकर पुनः प्रेम में प्रवृत्त होता था।
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