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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 2
तत्र तीर्थसलिलेन दीर्घिकास्तल्पमन्तरितभूमिभिः कुशैः । सौधवासमुटजेन विस्मृतः संचिकाय फलनिःस्पृहस्तपः ॥
वहाँ उसने तीर्थजल से भरी सरोवरों के बीच कुशासन पर रहकर, राजमहलों को त्यागकर फल की इच्छा रहित तप किया।
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