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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 18
तेन दूतिविदितं निषेदुषा पृष्ठतः सुरतवाररात्रिषु । शुश्रुवे प्रियजनस्य कातरं विप्रलम्भपरिशङ्किनो वचः ॥
उसके पीछे दूतियों द्वारा बताई गई बातों से, रात्रि के प्रेम मिलनों में वह प्रियजनों की विरह-भरी बातें सुनता था।
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