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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 13
अङ्कमङ्कपरिवर्तनोचिते तस्य निन्यतुरशून्यतामुभे । वल्लकी च हृदयंगमक्षमा वल्गुवागपि च वामलोचना ॥
उसकी गोद में वीणा और सुंदर नेत्रों वाली स्त्री, दोनों ही बारी-बारी से स्थान लेकर उसे कभी अकेला नहीं रहने देती थीं।
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