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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 12
सातिरेकमदकारणं रहस्तेन दत्तमभिलेषुरङ्गनाः । ताभिरप्युपहृतं मुखासवं सोऽपिबद्बकुलतुल्यदोहदः ॥
वह गुप्त रूप से स्त्रियों को अधिक मदिरा देता और वे भी उसे अपने मुख से पान करातीं, जिसे वह बड़े प्रेम से ग्रहण करता।
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