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रघुवंशम् • अध्याय 19 • श्लोक 11
घ्राणकान्तमधुगन्धकर्षिणीः पानभूमिरचनाः प्रियासखः । अभ्यपद्यत स वासितासखः पुष्पिताः कमलिनीरिव द्विपः ॥
वह प्रियाओं के साथ सुगंधित मदिरा से भरे कक्षों में ऐसे प्रवेश करता था, जैसे पुष्पित कमलिनी में हाथी प्रवेश करता है।
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