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रघुवंशम् • अध्याय 18 • श्लोक 5
तस्यानलौजास्तनयस्तदन्ते वंशश्रियं प्राप नलाभिधानः । यो नड्वलानीव गजः परेषां बलान्यमृद्गान्नलिनाभवक्त्रः ॥
उसके बाद नल नामक पुत्र ने वंश की शोभा बढ़ाई, जो हाथी की तरह शत्रुओं की सेना को नष्ट करता था।
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