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रघुवंशम् • अध्याय 18 • श्लोक 47
उरस्यपर्याप्तनिवेशभागा प्रौढीभविष्यन्तमुदीक्षमाणा । संजातलज्जेव तमालपत्रच्छायाछलेनोपजुगूह लक्ष्मीः ॥
उसके वक्ष पर स्थान पाने की प्रतीक्षा करती हुई लक्ष्मी मानो तमालपत्र की छाया में लज्जा से छिपी हुई प्रतीत होती थी।
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