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रघुवंशम् • अध्याय 18 • श्लोक 42
मणौ महानील इति प्रभावादल्पप्रमाणेऽपि यथा न मिथ्या । शब्दो महाराज इति प्रतीतस्तथैव तस्मिन्युयुजेऽर्भकेऽपि ॥
जैसे छोटा होने पर भी मणि को महानील कहा जाता है, वैसे ही वह बालक होते हुए भी महाराज कहलाने योग्य था।
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