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रघुवंशम् • अध्याय 18 • श्लोक 40
कामं न सोऽकल्पत पैतृकस्य सिंहासनस्य प्रतिपूरणाय । तेजोमहिम्ना पुनरावृतात्मा तद्व्याप चामीकरपिञ्जरेण ॥
यद्यपि वह पिता के सिंहासन के योग्य नहीं था, फिर भी अपने तेज से उसने उसे पूर्ण कर दिया, जैसे सोने का आवरण।
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