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रघुवंशम् • अध्याय 18 • श्लोक 32
तस्य प्रभानिर्जितपुष्परागं पौष्यां तिथौ पुष्यमसूत पत्नी । तस्मिन्नपुष्यन्नुदिते समग्रां पुष्टिं जनाः पुष्य इव द्वितीये ॥
उसकी पत्नी ने पौष माह में पुष्य नामक पुत्र को जन्म दिया, जिसके उदय से लोगों को पूर्ण समृद्धि प्राप्त हुई।
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