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रघुवंशम् • अध्याय 18 • श्लोक 31
वंशस्थितिं वंशकरेण तेन संभाव्य भावी स सखा मघोनः । उपस्पृशन्स्पर्शनिवृत्तलौल्यस्त्रिपुष्करेषु त्रिदशत्वमाप ॥
वंश को स्थिर रखकर वह भविष्य में इन्द्र का सखा बना और त्रिपुष्कर तीर्थ में स्नान करके देवत्व को प्राप्त हुआ।
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