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रघुवंशम् • अध्याय 18 • श्लोक 30
पात्रीकृतात्मा गुरुसेवनेन स्पष्टाकृतिः पत्ररथेन्द्रकेतोः । तं पुत्रिणां पुष्करपत्रनेत्रः पुत्रः समारोपयदग्रसंख्याम् ॥
गुरु सेवा से योग्य बने उस राजा को उसके पुत्र ने, जो कमल नेत्रों वाला था, वंश में अग्र स्थान पर स्थापित किया।
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