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रघुवंशम् • अध्याय 18 • श्लोक 25
अंशे हिरण्याक्षरिपोः स जाते हिरण्यनाभे तनये नयज्ञः । द्विषामसह्यः सुतरां तरूणां हिरण्यरेता इव सानिलोऽभूत् ॥
हिरण्यनाभ नामक पुत्र उत्पन्न हुआ, जो शत्रुओं के लिए अत्यंत भयानक था, जैसे अग्नि के साथ वायु प्रज्वलित होती है।
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