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रघुवंशम् • अध्याय 18 • श्लोक 19
तं रागबन्धिष्ववितृप्तमेव भोगेषु सौभाग्यविशेषभोग्यम् । विलासिनीनामरतिक्षमाऽपि जरा वृथा मत्सरिणी जहार ॥
वह भोगों में आसक्त होते हुए भी संतुष्ट नहीं था, परन्तु वृद्धावस्था ने उसे व्यर्थ ही उससे दूर कर दिया।
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