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रघुवंशम् • अध्याय 18 • श्लोक 17
तस्याभवत्सूनुरुदारशीलः शिलः शिलापट्टविशालवक्षाः । जितारिपक्षोऽपि शिलीमुखैर्यः शालीनतामव्रजदीड्यमानः ॥
उसका पुत्र शील नामक था, जिसका विशाल वक्ष था और जो शत्रुओं को जीतकर भी विनम्र बना रहा।
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