पिता समाराधनतत्परेण पुत्रेण पुत्री स यथैव तेन । पुत्रस्तथैवात्मजवत्सलेन स तेन पित्रा पितृमान्बभूव ॥
जिस प्रकार वह पिता अपने पुत्र की सेवा से संतुष्ट था, उसी प्रकार वह पुत्र भी अपने पुत्र से स्नेह पाकर आदर्श पिता बना।
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