स नैषधस्यार्थपतेः सुतायामुत्पादयामास निषिद्धशत्रुः । अनूनसारं निषधान्नगेन्द्रात्पुत्रं यमाहुर्निषधाख्यमेव ॥
उस निषिद्धशत्रु ने नैषध के धनपति की पुत्री से निषध नामक पुत्र उत्पन्न किया, जो निषध पर्वत के समान ही सामर्थ्यवान था।
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