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रघुवंशम् • अध्याय 17 • श्लोक 74
दुरितं दर्शनेन घ्नंस्तत्त्वार्थेन नुदंस्तमः । प्रजाः स्वतन्त्रयांचक्रे शश्वत्सूर्य इवोदितः॥
वह दर्शन से पापों का नाश करता और सत्य से अज्ञान का अंधकार दूर करता हुआ, सूर्य की तरह प्रजा को स्वतंत्र बनाता था।
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