प्रायः प्रतापभग्नत्वादरीणां तस्य दुर्लभः । रणो गन्धद्विपस्येव गन्धभिन्नान्यदन्तिनः॥
उसके प्रताप से शत्रु पहले ही टूट जाते थे, इसलिए युद्ध दुर्लभ हो गया, जैसे गंधयुक्त हाथी के सामने अन्य हाथी नहीं टिकते।
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