इति क्रमात्प्रयुञ्जानो राजनीतिं चतुर्विधाम् । आ तीर्थादप्रतीघातं स तस्याः फलमानशे॥
इस प्रकार चार प्रकार की राजनीति का प्रयोग करते हुए उसने बिना किसी बाधा के उसके फल प्राप्त किए।
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