कोशेनाश्रयणीयत्वमिति तस्यार्थसंग्रहः । अम्बुगर्भो हि जीमूतश्चातकैरभिनन्द्यते॥
उसने धन संचय इसलिए किया कि वह दूसरों का सहारा बन सके, जैसे जल से भरे बादल चातक पक्षियों द्वारा स्वागत किए जाते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।