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रघुवंशम् • अध्याय 17 • श्लोक 50
मन्त्रः प्रतिदिनं तस्य बभूव सह मन्त्रिभिः । स जातु सेव्यमानोऽपि गुप्तद्वारो न सूच्यते॥
वह प्रतिदिन मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श करता था, परंतु उसका गुप्त रहस्य कभी प्रकट नहीं होता था।
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