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रघुवंशम् • अध्याय 17 • श्लोक 5
स कुलोचितमिन्द्रस्य साहायकमुपेयिवान् । जघान समरे दैत्यं दुर्जयं तेन चावधि॥
उसने कुल के अनुरूप इन्द्र की सहायता करते हुए युद्ध में एक दुर्जेय दैत्य का वध किया।
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